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पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे रूट विवाद पर बिहार सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, अलाइनमेंट में बदलाव से किया इनकार

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पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट विवाद पर बिहार सरकार ने सफाई दी है। पथ निर्माण विभाग ने कहा कि एक्सप्रेसवे के रूट में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भूमि अधिग्रहण स्वीकृत नक्शे के अनुसार जारी है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट को लेकर उठ रहे विवाद के बीच बिहार सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के मार्ग में किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार एक्सप्रेसवे का निर्माण उसी स्वीकृत अलाइनमेंट के आधार पर किया जा रहा है, जिसे पहले ही तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है।

समस्तीपुर जिले में एक्सप्रेसवे के रूट को लेकर सामने आई चर्चाओं के बाद सरकार की ओर से यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। विभाग ने कहा है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पहले से तय मार्ग के अनुसार ही आगे बढ़ रही है। रूट बदलने या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या संस्था के दबाव में निर्णय लेने जैसी बातें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।

पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का अलाइनमेंट तैयार करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा गया था। इसमें तकनीकी मानक, सामाजिक प्रभाव, आर्थिक लाभ और भविष्य की जरूरतों को शामिल किया गया। विभाग ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत समीक्षा के बाद इस मार्ग को अंतिम रूप दिया था।

सरकार के मुताबिक एक्सप्रेसवे के वर्तमान अलाइनमेंट को 15 जनवरी 2025 को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी इसी स्वीकृत योजना के आधार पर शुरू की गई। विभाग ने बताया कि मार्च 2026 में जारी भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना भी इसी अलाइनमेंट के अनुरूप है। ऐसे में मार्ग में बदलाव की खबरों का कोई आधार नहीं है।

विभाग ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 48 से 53 के बीच मार्ग परिवर्तन की बात कही गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस हिस्से में भी कोई संशोधन नहीं किया गया है। सड़क निर्माण की पूरी योजना पहले से निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है।

पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना मानी जा रही है। इस सड़क के बनने से राज्य के कई जिलों में आवागमन आसान होने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

अलाइनमेंट विवाद के बीच के.एस.आर. कॉलेज से जुड़े मुद्दे पर भी विभाग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पथ निर्माण विभाग ने कहा कि कॉलेज की मुख्य इमारत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए केवल कॉलेज की कुछ खाली जमीन अधिग्रहण के दायरे में आ रही है। इससे कॉलेज की पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकार ने यह भी बताया कि एक्सप्रेसवे का मार्ग तय करते समय लोगों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। विभाग के अनुसार वर्तमान अलाइनमेंट ऐसा रखा गया है, जिससे कम से कम लोगों को प्रभावित होना पड़े। मौजूदा योजना में लगभग 65 आवासीय और व्यावसायिक संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं।

विभाग का कहना है कि अगर किसी अन्य वैकल्पिक मार्ग को अपनाया जाता तो नुकसान और अधिक हो सकता था। उस स्थिति में 200 से ज्यादा निर्मित संरचनाएं प्रभावित होतीं और बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ता। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह और सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद वर्तमान मार्ग को बेहतर विकल्प माना गया।

पथ निर्माण विभाग ने लोगों से अपील की है कि एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करें। विभाग ने कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ परियोजना को आगे बढ़ा रही है और सभी निर्णय निर्धारित नियमों और तकनीकी जांच के आधार पर लिए जा रहे हैं।

बिहार में बड़े सड़क नेटवर्क के विस्तार की दिशा में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह परियोजना राज्य के परिवहन ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद रूट बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है।

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पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। ऐसे में इसके अलाइनमेंट को लेकर किसी भी तरह की चर्चा या विवाद लोगों की चिंता बढ़ा सकता है। सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हुआ है कि परियोजना का मार्ग पहले से स्वीकृत योजना के अनुसार ही आगे बढ़ रहा है।

किसी भी बड़े सड़क प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण एक संवेदनशील विषय होता है। इसमें विकास और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है। सरकार का दावा है कि वर्तमान अलाइनमेंट में कम से कम लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है।

एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास, रोजगार और बेहतर कनेक्टिविटी से जुड़ी होती हैं। इसलिए ऐसी योजनाओं को लेकर सही जानकारी जनता तक पहुंचना बेहद जरूरी है।

प्रशासन और सरकार को चाहिए कि परियोजना से जुड़े सभी तथ्यों को समय-समय पर सार्वजनिक करते रहें, ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो और लोगों का विश्वास बना रहे।

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